गंगा और इसकी सहायक नदियों में पिछले कई वर्षों के दौरान विदेशी प्रजाति की मछलियों की संख्या के बढ़ जाने से कतला, रोहू और नैन जैसी कई तरह की देसी मछलियों की प्रजाति का अस्तित्व खतरे में आ गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्रास्थलीय मात्यसिकी अनुसंधान के प्रभारी ने बताया कि मछली की विदेशी प्रजाति खासकर की तिलैपिया और थाई मांगुर ने गंगा नदी में पाई जाने वाली प्रमुख देसी मछलियों की प्रजातियों कतला, रोहू, नैन के साथ ही पड़लिन, टेंगरा, मांगुर आदि का अस्तित्व खतरे में डाल दिया है।  

 

Read more click